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👉 *आत्म-चिंतन* *एक मालन को रोज़ राजा की सेज़ को फूलों से सजाने का काम दिया गया था। वो अपने काम में बहुत निपुण थी। एक दिन सेज़ सजाने के बाद उसके मन में आया की वो रोज़ तो फूलों की सेज़ सजाती है, पर उसने कभी खुद फूलों के सेज़ पर सोकर नहीं देखा था।* कौतुहल-बस वो दो घड़ी फूल सजे उस सेज़ पर सो गयी। उसे दिव्य आनंद मिला। ना जाने कैसे उसे नींद आ गयी। *कुछ घंटों बाद राजा अपने शयन कक्ष में आये। मालन को अपनी सेज़ पर सोता देखकर राजा बहुत गुस्सा हुआ। उसने मालन को पकड़कर सौ कोड़े लगाने की सज़ा दी।* मालन बहुत रोई, विनती की, पर राजा ने एक ना सुनी। *जब कोड़े लगाने लगे तो शुरू में मालन खूब चीखी चिल्लाई, पर बाद में जोर-जोर से हंसने लगी।* राजा ने कोड़े रोकने का हुक्म दिया और पूछा - *"अरे तू पागल हो गयी है क्या? हंस किस बात पर रही है तू?"* मालन बोली - "राजन! मैं इस आश्चर्य में हंस रही हूँ कि *जब दो घड़ी फूलों की सेज़ पर सोने की सज़ा सौ कोड़े हैं, तो पूरी ज़िन्दगी हर रात ऐसे बिस्तर पर सोने की सज़ा क्या होगी?"* राजा को मालन की बात समझ में आ गयी, वो अपने कृत्य पर बेहद शर्मिंदा हुआ और जन कल्याण में अपने जीवन क...
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👉 *इष्ट की उपासना का मर्म* *दिन ढल रहा था। रात तथा दिन फिर से बिछुड़ जाने को कुछ क्षणों के लिये एक दूसरे में विलीन हो गये थे। रम्य वनस्थली में एक पर्णकुटी में से कुछ धुआँ सा उठ रहा था। कुटीर में निवास करने वाले दो ऋषि- शनक तथा अभिप्रतारी अपना भोजन तैयार कर रहे थे। वनवासियों का भोजन ही क्या? कुछ फल तोड़ लाये-कुछ दूध से काम चल गया-हाँ, कन्द-मूलों को अवश्य आँच में पकाना होता था। भोजन लगभग तैयार हो चुका था और उसे कदलीपत्रों पर परोसा जा रहा था।* तभी बाहर किसी आगन्तुक के आने का शब्द हुआ। दोनों ने जानने का प्रयत्न किया। बाहर एक युवा ब्रह्मचारी खड़ा था।  *ऋषि ने प्रश्न किया- 'कहो वत्स! क्या चाहिए?' युवक विनम्र वाणी में बोला- 'आज प्रातः से अभी तक मुझे कुछ भी प्राप्त नहीं हो सका है। मैं क्षुधा से व्याकुल हो रहा हूँ। यदि कुछ भोजन मिल जाता, तो बड़ी दया होती।'* कुटीर निवासी कहने को वनवासी थे, हृदय उनका सामान्य गृहस्थों से भी कहीं अधिक संकीर्ण था। मात्र सिद्धान्तवादी थे वे- व्यावहारिक वेदाँती नहीं थे। सो रूखे स्वर में कहा- 'भाई तुम किसी गृहस्थ का घर देखो। हम तो वनवासी हैं। अपने ...

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👉 *शर्मिंदा* *फ़ोन की घंटी तो सुनी मगर आलस की वजह से रजाई में ही लेटी रही। उसके पति राहुल को आखिर उठना ही पड़ा।* दूसरे कमरे में पड़े फ़ोन की घंटी बजती ही जा रही थी।इतनी सुबह कौन हो सकता है जो सोने भी नहीं देता, इसी चिड़चिड़ाहट में उसने फ़ोन उठाया। "हेल्लो, कौन" तभी दूसरी तरफ से आवाज सुन सारी नींद खुल गयी। "नमस्ते पापा।" "बेटा, बहुत दिनों से तुम्हे मिले नहीं सो हम दोनों ११ बजे की गाड़ी से आ रहे है। *दोपहर का खाना साथ में खा कर हम ४ बजे की गाड़ी वापिस लौट जायेंगे। ठीक है।" "हाँ पापा, मैं स्टेशन पर आपको लेने आ जाऊंगा।"* फ़ोन रख कर वापिस कमरे में आ कर उसने रचना को बताया कि मम्मी पापा ११ बजे की गाड़ी से आरहे है और दोपहर का खाना हमारे साथ ही खायेंगे। *रजाई में घुसी रचना का पारा एक दम सातवें आसमान पर चढ़ गया। "कोई इतवार को भी सोने नहीं देता, अब सबके के लिए खाना बनाओ। पूरी नौकरानी बना दिया है।" *गुस्से से उठी और बाथरूम में घुस गयी। राहुल हक्का बक्का हो उसे देखता ही रह गया। जब वो बाहर आयी तो राहुल ने पूछा "क्या बनाओगी।" गुस्से से भरी ...

*डीएल-आरसी नहीं दिखाने पर तत्काल चालान नहीं काट सकती ट्रैफिक पुलिस सुप्रीम कोर्ट*

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सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विनय कुमार गर्ग और एडवोकेट रोहित श्रीवास्तव के अनुसार सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 139 में प्रावधान किया गया है कि वाहन चालक को दस्तावेजों को पेश करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा. ट्रैफिक पुलिस तत्काल उसका चालान नहीं काट सकती है. नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी), इंश्योरेंस सर्टीफिकेट, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट सर्टिफिकेट तत्काल नहीं दिखाने पर ताबड़तोड़ चालान करने की खबरें आ रही हैं.  हालांकि सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के मुताबिक अगर आप ट्रैफिक पुलिस को मांगने पर फौरन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी), इंश्योरेंस सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) और परमिट सर्टिफिकेट नहीं दिखाते हैं, तो यह जुर्म नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विनय कुमार गर्ग और एडवोकेट रोहित श्रीवास्तव ने बताया कि सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 139 में प्रावधान किया गया है कि वाहन चालक को दस्तावेजों को पेश करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा. ट्रैफिक पुलि...

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एक तनख्वाह से कितनी बार टेक्स दूं और क्यों...जबाब है??? मैनें तीस दिन काम किया,  तनख्वाह ली - टैक्स दिया मोबाइल खरीदा - टैक्स दिया--' रिचार्ज किया - टैक्स दिया डेटा लिया - टैक्स दिया बिजली ली - टैक्स दिया घर लिया - टैक्स दिया TV फ्रीज़ आदि लिये - टैक्स दिया कार ली - टैक्स दिया पेट्रोल लिया - टैक्स दिया सर्विस करवाई - टैक्स दिया रोड पर चला - टैक्स दिया टोल पर फिर - टैक्स दिया लाइसेंस बनाया - टैक्स दिया गलती की तो - टैक्स दिया रेस्तरां मे खाया - टैक्स दिया पार्किंग का - टैक्स दिया पानी लिया - टैक्स दिया राशन खरीदा - टैक्स दिया कपड़े खरीदे - टैक्स दिया जूते खरीदे - टैक्स दिया कितबें ली - टैक्स दिया टॉयलेट गया - टैक्स दिया दवाई ली तो - टैक्स दिया गैस ली - टैक्स दिया सैकड़ों और चीजें ली ओर - टैक्स दिया, कहीं फ़ीस दी, कहीं बिल, कहीं ब्याज दिया, कहीं जुर्माने के नाम पर तो कहीं रिश्वत के नाम पर पैसा देने पड़े, ये सब ड्रामे के बाद गलती से सेविंग मे बचा तो फिर टैक्स दिया---- सारी उम्र काम करने के बाद कोई सोशल सेक्युरिटी नहीं, कोई पेंशन नही, कोई मेडिकल सुविधा नहीं, बच्चों के लिये अच्छे स्कूल नहीं,...

*वायरल फीवर*

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*वायरल फीवर*  *स्वस्थ भारत की और छोटा सा कदम.......*की और छोटी सी पेशकश आज कल या जब भी मौसम परिवर्तन होता है तो परिवार में  यह नाम सुनाई देता है कि वायरल फीवर हो गया है और डॉक्टर्स और हॉस्पिटल मैं एक लंबी कतार होती है इस बीमारी को ठीक करने के लिये और डॉ जांच और कुछ एंटीबायोटिक और साल्ट लेकर हम ठीक होते हो जाते है और जब तक  जेब से करीब 500 ₹ तक खर्च हो जाते है ।  और आपकी रसोई घर की ताकत का एक छोटा सा उधारहण नीचे पढ़े। आज कल *वाइरल fever*  बहुत फैला हुआ है और उसका कोई इलाज भी नहीं है। वाइरस अपना चक्र पूरा करता ही करता है। इसके लिये आप  *१ छोटा चम्मच सादा सफ़ेद नमक*को तवे पर तब तक भूनें जब तक ये अपना रंग न बदलने लगे, रंग बदलते(हल्का भूरा या हल्का सा कालिमा लिए हुए) ही इसे तवे से उतार लें और इसमें तुरंत १ चम्मच *अजवाइन* भून लें (ध्यान रखें भूनें पर जले न)। इस मिश्रण को इक ग्लास पानी में घोल कर उसमें इक पूरा नींबू निचोड़ कर पी लें ! एक दिन में ही बुखार छू मंतर होते देखा है ! ये नुस्ख़ा *टाइफ़ॉड और malaria*में भी उतना ही कारगर है ! यह मैसेज अगर आपको अच्छा लगे या समझ में आये की यह किसी के लिया...

*सुबह-सुबह टहलने से होने वाले फायदे*

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सुबह-सुबह ताजी ठंडी हवा में टहलने से आपकी फिटनेस तो बरकरार रहती ही है साथ ही आप कई गंभीर बीमारियों से भी दूर रहते हैं।नियमित रुप से की जाने वाली मार्निंग वॉक से आप हृदय रोग और गैस की समस्या के अलावा ऐसी ही कई बीमारियों से भी दूर रह सकते हैं। 1. टहलने से बेहतर कुछ नहीं:- लोग स्वस्थ व फिट रहने के लिए कई चीजें करते हैं। जैसे एक्सरसाइज करते हैं, जिम जाते हैं और योगा भी करते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस और बुजुर्गों के अपने अनुभव बताते हैं कि शरीर को स्वस्थ व फिट रखने के लिए सुबह या शाम टहलने का और कोई बेहतर विकल्प नहीं। 2. मधुमेह से बचाए:- नियमित रुप से टहलना मदुमेह रोगियों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। मधुमेह के कई मरीज सुबह की सैर के बाद अपने ब्लड सुगर के स्तर में कमी पाते हैं। इन मरीजों के लिए इन्सुलिन के बजाय सुबह की सैर अच्छा विकल्प होता है। इससे आप मधुमेह के खतरे सेभी बच सकते हैं। 3. स्वस्थ हृदय:- बढ़ती उम्र में अगर हर रोज कम से कम दो मील पैदल चला जाए तो मांसपेशियों का अच्छा व्यायाम हो जाता है। ऐसे लोगों को हृदयाघात होने का खतरा भी कम हो जाता है। तेज गति से टहलने से हृदय की धड़कनें त...