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एक व्यक्ति आफिस में देर रात तक काम करने के बाद थका-हारा घर पहुंचा . दरवाजा खोलते ही उसने देखा कि उसका छोटा सा बेटा सोने की बजाय उसका इंतज़ार कर रहा है . अन्दर घुसते ही बेटे ने पूछा —" पापा , क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूँ ?" " हाँ -हाँ पूछो , क्या पूछना है ?" पिता ने कहा . बेटा – " पापा , आप एक घंटे में कितना कमा लेते हैं ?" " इससे तुम्हारा क्या लेना देना …तुम ऐसे बेकार के सवाल क्यों कर रहे हो?" पिता ने झुंझलाते हुए उत्तर दिया .बेटा – " मैं बस यूँ ही जाननाचाहता हूँ . प्लीज बताइए कि आप एक घंटे में कितना कमाते हैं ?" पिता ने गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए कहा , नहीं बताऊंगा , तुम जाकर सो जाओ "यह सुन बेटा दुखी हो गया …और वह अपने कमरे में चला गया . व्यक्ति अभी भी गुस्से में था और सोच रहा था कि आखिर उसके बेटे ने ऐसा क्यों पूछा ……पर एक -आधघंटा बीतने के बाद वह थोडा शांत हुआ ,फिर वह उठ कर बेटे के कमरे में गया और बोला , " क्या तुम सो रहे हो ?", "नहीं " जवाब आया . " मैं सोच रहा था कि शायद मैंने बेकार में ही तुम्ह...
कैंसर से बचने के उपाय खोजने से बेहतर है इस से बचा ही जाये क्योंकि ये एक गंभीर बीमारी है जिस से बचने के लिए हमे कुछ अधिक नहीं करना होता है जबकि ऐसा होता है जब मैं किसी को गुटके या अन्य तम्बाकू के Product न use करने को कहता हूँ तो उल्टा मुझे सुननी पड़ती है कि " फलाने ने तो पूरी जिन्दगी खाया उसे तो कुछ नहीं हुआ " | तो भाई आप किसी और की बात क्यों करते है खुद की करिए न ? और असल में ऐसा इसलिए है कि आज के मुकाबले पहले के लोग हमसे कंही अधिक मेहनत वाली और मुश्किल जिन्दगी जीते थे इसलिए " उनका रोग प्रतिरोधक सिस्टम" भी तो मजबूत था जबकि आज के विलासिता पूर्ण जिन्दगी में ऐसा नहीं है चलिए हम कैंसर के बारे में और उस से बचने के लिए कुछ अहम् बातों पर नजर डालते है | आप भी मेरी तरह ये कह सकते है कि अब तो ये बीमारी आम है और बदलती जीवनशैली या खानपान का ही दुष्प्रभाव है चाहे कितना ही संयम वाली जिन्दगी जी लो लेकिन सच्चाई यही है कि हम अगर अपनी जिन्दगी में छोटी छोटी बातों का ध्यान रखे तो बड़ी आसानी से कैंसर जैसी भयावह बीमारी से बच सकते है | कैंसर के तेजी से फैलने की वजह – ...
एक जर्मन विचारक था, हेरिगेल। वह जापान गया हुआ था। एक फकीर से मिलने गया। जल्दी में था, जाकर जूते उतारे, दरवाजे को धक्का दिया, भीतर पहुंचा। उस फकीर को नमस्कार किया और कहा कि मैं जल्दी में हूं। कुछ पूछने आया हूं। उस फकीर ने कहा बातचीत पीछे होगी। पहले दरवाजे के साथ दुर्व्यवहार किया है उससे क्षमा मांग कर आओ। वे जूते तुमने इतने क्रोध से उतारे हैं। नहीं—नहीं, यह नहीं हो सकता है। यह दुर्व्यवहार मैं पसंद नहीं कर सकता। पहले क्षमा मांग आओ, फिर भीतर आओ, फिर कुछ बात हो सकती है। तुम तो अभी जूते से भी व्यवहार करना नहीं जानते, तो तुम आदमी से व्यवहार कैसे करोगे? वह हेरिगेल तो बहुत जल्दी में था। इस फकीर से दूर से मिलने आया था। यह क्या पागलपन की बात है। लेकिन मिलना जरूर था और यह आदमी अब बात भी नहीं करने को राजी है आगे। तो मजबूरी में उसे दरवाजे पर जाकर क्षमा मांगनी पड़ी उस द्वार से, क्षमा मांगनी पड़ी उन जूतों से। लेकिन हेरिगेल ने लिखा है कि जब मैं क्षमा मांग रहा था तब मुझे ऐसा अनुभव हुआ जैसा जीवन में कभी भी नहीं हुआ था। जैसे अ...
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